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Sadhana Mishra samishra

  Literary Colonel

" सरस्वती वंदना "

Children Inspirational

नमामि सरस्वत्यैः नमामि शारदेयं

1    51 1

वैदेही, अब तुम न आना इस देश

Tragedy

राम से अब रहा न नाता ताप त्याग का सहा न जाता सिया जगत मूढ़ विख्याता शूर्पनखा ने ओढ़ा नारी व...

1    117 0

मुक्तक

Inspirational

अपनी भाषा, संस्कृति का, जो करता नहीं मान भीड़ में खो जाएगा, बचे नहीं पहचान

1    2 0

कौन कहता है

Tragedy

कूद रहीं अंधकूप में, पापा की परियां असहाय से देखते, मां -बाप खड़े हुए हैं।

1    1 0

अनंत यात्रा हमारी

Abstract

वणिकों की बुद्धि से, करो न तुम व्यवहार वरना कल पूछ ही लेगा, कहाँ तुम्हारा हिंदुस्तान ?

1    280 0

उम्र झूठ की...

Others

झूठ की बुलंदी पर, कच्ची इमारतों की तामीर ! सच्चाइयों को धूमिल, काश, कभी की न होती

1    9 0

हमकदम बनूं कैसे

Romance

दुख हो चाहे सुख हो, तेरे संग काटूं मैं... बनके तेरी छाया, तेरे संग भागूं मैं..

1    129 8

चक्र समय का

Abstract

चक्र समय का घूमता अविराम कब ,कहाँ, किसी के रोके रुका।

1    32 1

" माँ "....

Others

मां तू है तो यह, स्वर्ग सी धरा है, वरना यहाँ किसी का, क्या धरा है|

1    30 0

साहित्य

Drama

सत्य की मशाल सदैव दैदिप्यमान हो ! कल हम हो या न हो, यह सदैव जलती रहे !

1    53 1

बचपन

Children Stories

परियों का देश, जादू का खिलौना बच्चे का मन होता रूई सरीखा !

1    8 0

सत्य की तलाश

Inspirational

सत्य पर इतना कीचड़ पड़ा है सतत प्रयास है एक नयी चाह है

1    31 0

आग और दाह

Tragedy

मन में दहकती दाह थी पर कहीं नहीं सिक रही थी रोटियाँ ?

1    54 0

याद तो तुम मुझे बहुत आये

Romance

अब ये जमाना, जो समझे... समझाए... याद तो तुम मुझे, बहुत आए...!

1    10 0

जीवन एक संघर्ष

Inspirational

कली से फूल बनना, है जीवन का उच्छ्श्वास ! सुवासित सुगंध का सुवास, एक आस-एक विश्वास !

1    22 0

जोगन हो ली मैं

Drama

दहके प्रेम की अगन.... होके प्रेम में मगन.... प्रेम की राख हो ली मैं.... सुध बुध खो ली मैं.....

1    37 0

" आत्मप्रवंचना "

Abstract

वही कथानक, बारंबार पुनरागमन मिथ्याचारी,अभिमानी, आत्मप्रवंचक मानुष।

1    35 0

रे मानव...तूने यह क्या किया

Inspirational

कानन नहीं, आनंद नहीं, कुएँ नहीं, तड़ाग नहीं, दरियाओं का मीठा जल, अब जहर बन गया...

1    71 1

"मेरी कविता "

Others

कुछ जग की, कुछ अंबर की, कुछ बातें मन की तेरी ! कुछ बातें मेरे मन की, शब्दों में ढ़लते रहती हूँ ! ...

2    305 49

एक ही नसीब

Drama Tragedy

वह कब जियी अपने लिए, उसे कोई और जी लेता है !

1    29 0

वृहद त्राण...

Drama

जिस यात्रा का कोई.. मंतव्य नहीं ! वृहद त्राण उससे बड़ा.... कोई नहीं.....!

1    337 34

पता कस्तूरी का

Others Tragedy

क्या तुमने कभी.. प्यार किया है.. मैंने तो नहीं किया.. लगता था सब.. तंज कस रहें हैं मुझ पर.. बिना ...

2    94 3

सखी री होरी है

Drama

होरी बड़ी बरजोर है...।

1    247 19

एक पाती तेरे प्यार की....

Romance

कुछ न लिखकर तुमने, मन का दरपन भेजा है ! सूने मन का सूना जीवन, हाल सारा लिक्खा है !!

1    181 6

सत्य की तलाश....

Drama

झूठ के कीचड़ से सत्य को धोने की सत्य की तलाश में निकल पड़ी हूँ मैं।

1    306 34

डरते स्वप्न

Inspirational

अभिव्यक्ति की आज़ादी को, अभी तो मैंने सीखा है ! खिल न सके ये फूल मेरे, तुमने कब पौधे को सींचा है ...

1    92 4

आखिर कसूर क्या था उनका

Inspirational

पत्नी ने मांगी थी हरी, धानी चूड़ियाँ, लेना था उन्हें मां बाप की दवाइयाँ ... आखिर कसूर था क्या उनका....

1    182 14

भाग कहाँ तक भागेगा

Action

सुनकर भारत की दहाड़, पतलून तेरी ढ़ीली है ! भाग, कहाँ तक भागेगा, बोल, कहाँ तेरी बोली है ?

1    276 22

हवन

Action

यहीं, इसी धरा पर, मिट कर ही चुकाना होगा !

1    82 2

कहानी दर्द की

Drama Tragedy

कम लिखे को ज्यादा समझना..! जो लिख नहीं पाई, उसे मेरा कहा समझना..!

1    33 2

मदनोत्सव

Drama

आनन में, कजरन में, हिय में हुलास सखि रतिकांत से कोई न बच पाय !

1    54 3

भ्रम..

Inspirational

बह चुका बहुत पानी नदियों में अब तक चाहता है तू क्यों मैं वहीं ठहरा रहूँ !!

1    72 2

हे बाँके-बिहारी

Drama

अद्भुत छवि तुम्हारी, हे बाँके बिहारी, पगड़ी की शोभा, लागे न्यारी न्यारी !

1    88 4

ओ मेरे कान्हा

Drama

ऐसो सुंदर छवि है तेरो, एक पल न बिसरा जाये रे ! कर कुछ ऐसो करतब कान्हा, पता तेरो मिल जावे रे !

1    108 4

एक छोटी कविता

Others

शब्दों के आक्रमण ना हो, सुकोमल भावना भी हो ! मधुर भाव, सहजता हो

1    116 4

माघ का कुंभ

Drama

माघ महीने की देखो शान, भारत की है यही पहचान !

1    55 2

बीते युग चार

Drama Tragedy

सिसक रहा मन, सुकून पाने को बिलख रही हर साँस, स्वतंत्र हो जाने को !

1    131 3

नफ़ीस गज़ल

Others

मंटो की फितरत के मालिक हो, नज़ीर प्रेमचंद की पेश करते हो ?

1    76 3

गाँठ

Drama

समझा दुनिया ने, अरे ! देखो यह कितनी ! समझदार हो गयी, मैं बावली, जाने कहाँ खो गई !

1    91 3

सत्यलेखन

Inspirational

चिंतक बैठा सिर धुनता, झूठ ही झूठ में जियें कैसे ?

1    99 4