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दिन बीतता है, उर्वशी की मां की तबीयत में थोड़ी सुधार होती है । दिन बीतता है, उर्वशी की मां की तबीयत में थोड़ी सुधार होती है ।
अगर कुछ बचा था तो वह था कटहल का पेड़, न जाने कितनी यादें। अगर कुछ बचा था तो वह था कटहल का पेड़, न जाने कितनी यादें।