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दूसरों की खता का ज़ख्म लेने के लिए खुद को न कर हाज़िर। दूसरों की खता का ज़ख्म लेने के लिए खुद को न कर हाज़िर।
अधूरे सपनों में अपने बच्चों के बचपन की अधूरी यादों की तरह, ललचाती है कभी ज़िन्दगी, अधूरे सपनों में अपने बच्चों के बचपन की अधूरी यादों की तरह, ललचाती है कभी ...