आकाशवाणी की सेवा से रिटायर्ड।लेखन में रुचि।अनेक पुस्तकें प्रकाशित |अनेक संस्थाओं से पुरस्कृत।
आप सभी को बताते चलें कि यह मेरी जबलपुर की दूसरी बार की यात्रा है। आप सभी को बताते चलें कि यह मेरी जबलपुर की दूसरी बार की यात्रा है।
उसे उड़ने की भूख थी , और पिंजरे में खाना रखा हुआ था ! ” उसे उड़ने की भूख थी , और पिंजरे में खाना रखा हुआ था ! ”
“उम्र बीत गई लेकिन, सफर ख़त्म न हुआ। इन अजनबी सी राहों में जो, खुद को ढूंढ़ने निकला “उम्र बीत गई लेकिन, सफर ख़त्म न हुआ। इन अजनबी सी राहों में जो, खुद को ढ...
ऐसा लग रहा था कि मानो यम देवता मेरे पास से, मुझे लगभग छूते हुए गुज़र गए हों। ऐसा लग रहा था कि मानो यम देवता मेरे पास से, मुझे लगभग छूते हुए गुज़र गए हों।
वकील प्रभाकर पाण्डेय मरणासन्न स्थित में थे और उनका इलाज लगभग खत्म हो चुका था वकील प्रभाकर पाण्डेय मरणासन्न स्थित में थे और उनका इलाज लगभग खत्म हो चुका था
अच्छा हुआ कि एक ऑटो वाले को हम पर दया आ गई और वह हमें गंतव्य तक ले गया। अच्छा हुआ कि एक ऑटो वाले को हम पर दया आ गई और वह हमें गंतव्य तक ले गया।
नियम कानून का भंडार है, फिर भी संविधान मेरा लाचार है।। नियम कानून का भंडार है, फिर भी संविधान मेरा लाचार है।।
ज़िन्दगी उसी की है जो सब कुछ खो कर भी मुस्कुराना जानता है ! ज़िन्दगी उसी की है जो सब कुछ खो कर भी मुस्कुराना जानता है !
अचीन्ही दुनिया में प्रवेश कर रहा था यह उत्कंठा लिए कि उस पार ना जाने क्या होगा ? अचीन्ही दुनिया में प्रवेश कर रहा था यह उत्कंठा लिए कि उस पार ना जाने क्या होगा ?
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर, मेल कराती मधुशाला।। बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर, मेल कराती मधुशाला।।