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जानता हूँ चली गयी हो तुम कभी न वापस आने के लिए। जानता हूँ चली गयी हो तुम कभी न वापस आने के लिए।
अभी अभी उसे मालूम हुआ कि भय से उपजा प्रेम और श्रद्धा अभी अभी उसे मालूम हुआ कि भय से उपजा प्रेम और श्रद्धा