Author of the Month Winner ( June 2022 )
यह उपन्यास दुखांत है। मन में एक प्रश्न छोड़ जाता है, मन वेदना से भर जाता है। यह उपन्यास दुखांत है। मन में एक प्रश्न छोड़ जाता है, मन वेदना से भर जाता है।
प्रवीण, बेटा तू कब आएगा? ये आँखें तुझे देखने को तरस गई हैं प्रवीण, बेटा तू कब आएगा? ये आँखें तुझे देखने को तरस गई हैं
दूसरों की दृष्टि से तो पूरी ज़िंदगी ख़ुद को देखा अब हम खुद को ख़ुद की नज़र से देखेंगे। दूसरों की दृष्टि से तो पूरी ज़िंदगी ख़ुद को देखा अब हम खुद को ख़ुद की नज़र से देख...
तुम बिल्कुल सही कहते थे कि इस दुनिया में सब झूठ है तुम बिल्कुल सही कहते थे कि इस दुनिया में सब झूठ है
उसे भी भूख थी लेकिन मांँ के स्पर्श एवम् प्यार की। उसे भी भूख थी लेकिन मांँ के स्पर्श एवम् प्यार की।
उसे डॉगी को शादी तय होने की मुबारकबाद तो देनी चाहिए थी। उसे डॉगी को शादी तय होने की मुबारकबाद तो देनी चाहिए थी।
कहाँ थे तुम दस दिनों से? मैं कितना परेशान थी! तुम्हारा नंबर भी नहीं लग रहा था कहाँ थे तुम दस दिनों से? मैं कितना परेशान थी! तुम्हारा नंबर भी नहीं लग रहा था
एक तरफ कोई छत ढूंढ रहा था ताकि उसके भींगते तन को बचाया जा सके। एक तरफ कोई छत ढूंढ रहा था ताकि उसके भींगते तन को बचाया जा सके।
कभी चाय राघव को बहुत प्रिय थी। कभी चाय राघव को बहुत प्रिय थी।
तुम बहुत प्यारे हो बेटा और तुम प्यार करने के लिए ही बने हो। तुम बहुत प्यारे हो बेटा और तुम प्यार करने के लिए ही बने हो।