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आँधी चीखते हुए सब तहस-नहस कर देती है आँधी चीखते हुए सब तहस-नहस कर देती है
समाज की नहीं होतीं खुद की ख्वाहिशें, वो छीन लेता है ये किसी की आत्मा से। समाज की नहीं होतीं खुद की ख्वाहिशें, वो छीन लेता है ये किसी की आत्मा से।