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Chandan Chaurasia

Others

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Chandan Chaurasia

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गृहणी

गृहणी

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(संपदा ) एक गृहणी अपने घर में बर्तन धोते रहती है। अचानक एक फोन की घंटी बजती है। वो तुरंत फोन की तरफ भागती है। लेकिन फर्श गीली होने के कारण वो फिसल जाती है, और पैर में मोच आ जाती है। इसलिए अपने बेटे राजू को बुलाती है। लेकिन वो अपने स्मार्ट फोन में व्यस्त रहता है। संपदा जैसे तैसे खुद उठकर मरहम लगाकर सो जाती है। शाम को संपदा का पति रमेश घर आते ही संपदा पर चिल्लाने लगता है। चिल्लाते हुए कहता है की मैने तुम्हें कितनी बार कॉल किया और तुमने एक बार भी जवाब नहीं दी। मैं अपने जरूरी कागज़ घर में ही छोड़ कर चला गया था। बोल कर गुस्सा में वहाँ से चला जाता हैं। अगले दिन रमेश की तबियत बिगड़ जाती है। और उसे अस्पताल में भर्ती किया जाता है। अस्पताल में बहुत ख़र्चा होने के कारण राजू का फ़ीस नहीं भर पाते है और इसलिए राजू को स्कूल से घर भेज दिया जाता है। संपदा अपने सारे रिश्तेदार से मदद माँगती है लेकिन कोई मदद नहीं मिलती है। संपदा अपने पड़ोसी से कोई नौकरी दिलवाने के लिए पूछती है। पड़ोसी चिढ़ाते हुए नौकरानी की नौकरी करेगी पूछती है। संपदा उसे हाँ कहकर अगले दिन से काम करने लगती है। तीन दिन बाद संपदा का मालिक उससे ये नौकरी करने का कारण पूछता है। तब संपदा उसे सारी कहानी बताती है। मालिक रमेश से मिलता है। और राजू की फ़ीस भी भर देता है। पाँच दिन बाद रमेश ठीक हो जाता है और घर वापस आते ही संपदा से माफ़ी मांगता है।


सीख :औरत जरूरत पड़ने पर परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है। इसलिए औरत को शक्ति का रूप कहाँ जाता है और माँ को भगवान का रूप।

तेरे चरणों मे स्वर्ग है । तेरे चरणों मे मैं रहूँ सदा। ऐ माँ मेरी रक्षा तुझ से बेहतर कौन है कर सकता।



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