प्यारी दादी मां
प्यारी दादी मां
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मेरे पिता की मां मेरी दादी थी
क्या बताए वो बहुत जज्बाती थी
थोड़े में ही रूठ जाती और फिर मान जाती थी
कभी कभी उनकी गुस्से से आंखे भर आती थी
जब वो खुश होती थी तो मुझे गले से लगती थी
अब वो साथ न होकर भी साथ है मेरे
कहीं नहीं गई वो पास है मेरे
गम ये ही हैं की वो मुझे अब गले नहीं लगाएगी
मेरे लिए अब वो प्रार्थना नहीं कर पाएगी। (मेरी प्यारी दादी मां)
