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तोजास्तकाळएकाकार्यातसमाधानीराहूशकतनाही.वसवयीचीगुलामगीरीझुगारत पुरुषोत्तम सामिष भोजन अविरामयुद्ध हँसना अंतर्निहित तन-मन सत्य बनेजिससेतकदीरदेशकीमैंऐसीखुद्दारीलिखतीहूँ। पलायन सत्कर्म का उचित समय सहीगलत जिंदगी खाद्यपदार्थप्रतिभाउवाच अपूरणीय क्षति प्रेमहिईश्वरहै वे विचार सन्यास बुद्धिमान लकिरऔरतकदीर

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