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यह कैसी...
“
यह कैसी घुटन सी छाई है, कोरोना ने प्रलय मचाई है। बहू बेटी के चूड़ी टूट रहे, लोग शव को भी लूट रहे। कैसी पसरी बेरोजगारी है, आज फिर किसी अपने की शव घर पर आई है
”
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राजेश "बनारसी बाबू"
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क्याहैकुंठा-घुटनक्याहैव्यथा-निराशा
बहू
आदर्शविचार
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राजेश "बनारसी बाबू"
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