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ये तेरी...

ये तेरी नजरें बेकरारी बढ़ाती बहुत है तेरी अदाएं तेरी नज़ाकत घायल करती मेरे दिल को बहुत है ये गुलशन ये बहारें तेरे बगैर चिढ़ाती मुझे बहुत है

By Ajay Rajpoot
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