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ये मीलों की...

ये मीलों की दूरियां तो महज बहाना है यार क्यूंकि हम आज भी चाँद तले उनका दीदार करते हैं तो क्या हुआ जो कभी अमावस आ गई हम फिर से चांद निकलने का इंतजार करते हैं...

By mansi raj
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