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वो शरारती...

“ वो शरारती आँखें जब मुझे देखती थीं हया के बोझ से मेरी पलकें झुक जाती थीं बेखुदी रहती थी हलका-सा नशा रहता था होश खो जाते थे मेरी धड़कनें रुक जाती थीं ”

By Dr. Nidhi Priya
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