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"तुं जब...
“
"तुं जब मुस्कुराती है तो, मुज़े खिली हुयी बसंत लगती है, लेकिन तुं जब रूठकर मांयके चली जाती है तो " मुरली", मुज़े पतझड़की विरानी मेहसुस होती है।" -धनजीभाई गढीया "मुरली"
”
By
Dhanjibhai gadhiya "murali"
39
मुश्कुराती
बसंत
रूठकर
मांयके
पतझड़
विरानी
मेहसुस
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hindi quote
from
Dhanjibhai gadhiya "murali"
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