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तुम्हारी...

“ तुम्हारी रूह तक मेरी पहचान है, कितना छुपाओगे खुद को ? आंखों में जो भरें आंसु है, कितना रोक पाओगे उनको ? अब जो टूटे हो तो बिखर जाओ मेरे बाहों में कितना सम्भाल पाओगे खुद को ? आखिर कितना दूर करोगे खुद को ? ”

By akash bansirar
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