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तुम सू्र्य...

तुम सू्र्य से तेजवान, आग खुद में समेटे हुए, अपने तेज से सबको प्रभावित करने वाले, और मैं धरा सी प्रकृति के नियम तोड़, तुम में मिल जाने को आतुर, खुद को बर्बाद करने के लिए, ओज़ोन परत को खत्म करते हुए, भूमंडलीय ऊष्मीकरण के जैसे, तुम तक पहुँचने से पहले, खुद ही वाष्पित हो जाने वाली, और खुद के साथ ही खत्म कर देती हूँ, बहुत से निर्दोषों का अस्तित्व।

By Juhi Grover
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