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तुम बहते रहते...
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तुम बहते...
“
तुम बहते रहते हो हम ठहरे रहते है तुम हवा के झोंके हो तुम्हें ना रुकना आता है हम पत्थर से है हमें ना बहना आता है दोनों नदी के दो किनारे है जिसे ना मिलना आता है।।अमृता
”
By
Amrita Rai
53
तुम
एकदिनमौज-मस्तीकरलेंवक्तकेबहावमेंमनकीकरलेइसबहतेहुएपड़ावपरथामलेपरिवारकेअनमोलसाथकोपलभरकेलिएउनकेलिएजीले
रहते हो
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Amrita Rai
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