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तरंगित हो जाता...
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तरंगित हो...
“
तरंगित हो जाता है तन-मन, हो उल्लासपूर्ण सबकी ही बोली। जड़-चेतन प्रकृति का कण-कण, झूमता है जब आती है होली। # गायत्री सिंह #
”
By
Gayatri Singh
288
तरंगित
तन-मन
उल्लासपूर्ण
खड़ीबोली
प्रकृति का कण-कण
झूमता
होली
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hindi quote
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Gayatri Singh
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