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स्वप्न सदृश...
“
स्वप्न सदृश तो ही है यह जग सारा, परिस्थितिजन्य है अभिनय हमारा। न चिंता न अवसाद न कोई निराशा, सदा जागृत रखें मन में सशक्त आशा। @ डी पी सिंह कुशवाहा @
”
By
Dhan Pati Singh Kushwaha
281
स्वप्न सदृश
जग सारा
अभिनय
चिंता
अवसाद
क्याहैकुंठा-घुटनक्याहैव्यथा-निराशा
जागृत रखें
आशा
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hindi quote
from
Dhan Pati Singh Kushwaha
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