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Dhan Pati Singh Kushwaha
Literary General
AUTHOR OF THE YEAR 2020 - NOMINEE

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TEACHER IN DIRECTORATE OF EDUCATION, NATIONAL CAPITAL TERRITORY OF DELHI

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Submitted on 29 Nov, 2021 at 19:04 PM

खोया धन दौलत खोकर भी, अर्जित कर सकते करके प्रयास। एक बार खोया तो वापस न पाएंगे, आजीवन जग में खोया हुआ विश्वास। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 29 Nov, 2021 at 18:49 PM

खोया धन दौलत खोकर भी, अर्जित कर सकते करके प्रयास। एक बार खोया तो वापस न पाएंगे, आजीवन जग में खोया हुआ विश्वास। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 29 Nov, 2021 at 18:43 PM

खोया धन दौलत खोकर के भी, अर्जित कर सकते हैं करके प्रयास। एक बार खोया तो फिर न पाएंगे, आजीवन जग में खोया विश्वास । @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 28 Nov, 2021 at 18:49 PM

जगत में सदा ही रखें हम यह अहसास, शक्ति प्रभु ने दी हम सबको ही है खास। सफलता तो हमें मिलेगी ,हमारी शक्ति है विश्वास, न एक पल दूर ये हमसे,सदा ही है अपने यह पास। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 28 Nov, 2021 at 07:35 AM

स्वप्रेम बहाएगा प्यार की सरिता, जिससे सुखमय होगा सारा संसार। स्वार्थ भाव से दूर हम रहें सदा ही, यथासंभव करिए सबका ही उपकार। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 26 Nov, 2021 at 18:35 PM

स्वप्रेम से प्रेम का अभ्यास करें अपना, सबसे प्रेम करने का करें पूरा निज सपना। स्वप्रेमी खुद को प्यार करके सपना साकार, वह संसार से और उससे प्यार करेगा संसार। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 26 Nov, 2021 at 00:52 AM

खुद से शुरू होती है सबकी दुनिया, सकल जगत का होता है यह नियम। सुख बांटेंगे तो सुख मिलेगा सबको, दे पाएंगे प्रेम करके पहले स्वप्रेम हम। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 25 Nov, 2021 at 00:00 AM

प्रेम तो होती है चाहत सभी की, प्रेम बिन जग में बने न कोई बात। खुद से प्रेम कर ही कर सकेंगे सभी से, स्वप्रेम ही तो है प्रेम की जग में शुरुआत। @ डी पी सिंह कुशवाहा @

Submitted on 23 Nov, 2021 at 19:00 PM

होता प्रेम अथाह है, इसका आदि न अंत। स्वप्रेम करना जिसे आ गया, ऐसे ही बड़भागी होते हैैं संत। @ डी पी सिंह कुशवाहा @


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