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सूखे फूल...

सूखे फूल बरसों बन्द रह कर भूल जाते हैं यों अपना ही अस्तित्व, और किताबें भी उनकी महक से नये जन्म सा एहसास कर पाती हैं। यों नये अस्तित्व का एहसास बेजान चीज़ों में जान ही डाल देता है, और फिर वहीं किताबें देह के साथ रूहानियत महसूस कर पाती हैं।

By Juhi Grover
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