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सुनसान...

सुनसान राहों को हम सजाते रहे उनके सजदे में सिर को झुकाते रहे दर्द-ए-दास्तां लिखने बैठ ही थे हम कि हमें देख वो से फिर मुस्कुराते रहे शिखा सिंह भारद्वाज

By Shikha Singh
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