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श्रृंगार भी...
“
श्रृंगार भी जब मैं लिखूँ रस वीर तुम भरना, जीना मेरा भारत पे हो भारत पे हो मरना| भगवान मेरे मन में छवि भारत की ही दे दो, भारत ही मेरा प्रेम ही भारत ही हो गहना।
”
By
Kusum Joshi
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भारतपरिचय
श्रृंगार
चाहेकष्टअपार।हरसंकटमेंसाथहो
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Kusum Joshi
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