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"सबको...

"सबको मुठ्ठी में रखकर, इंसान कर रहा जुल्म-सितम, मलिन मन हम कैसे पहचाने, चेहरे पे लगा है मुखौटा। "मुरली" मन मंथन कर रहा है, मायूस हुआ है दिल, क्या करे? किस को कहे? कौन हटाएगा ये मुखोटा।" -धनजीभाई गढीया "मुरली"

By Dhanjibhai gadhiya "murali"
 


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