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"सा" से सूर...
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"सा" से सूर...
“
"सा" से सूर मिलाता हुं, "रे" से सूर रेलाता हु, "ग" से गीत गाता हुं, "म" से मधुर बनाता हुं, "प" से पारंगत बनता हुं, "ध"से धैर्य रखता हुं, "नि" से निर्मल बनकर मै, तार सप्तक के "सां" को स्पर्शता हुं। -धनजीभाई गढीया "मुरली"
”
By
Dhanjibhai gadhiya "murali"
2315
प्रेमनश्वरनाखूबसूरतीनश्वर
रेलाता
गंभीरता
मधुरभावना
पारंगत
धैर्य
निर्मल
तार सप्तक
स्पर्श
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Dhanjibhai gadhiya "murali"
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