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रोटी की...

रोटी की लड़ाई महज़ब से ज़्यादा बड़ी है जन्नत का पता नहीं ज़िंदगी इसी से मिलती है | अभिलाष दीक्षित ❣️

By Shayariepaigham Kijindagi
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