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रोज़ सी रात...

रोज़ सी रात से दिन, फिर दिन से रात हुई है,  रोज़ से दो दिल तड़पे हे, फिर बिरह की बात हुई है, रोज़ सी सुनसान सड़क, रोज़ सा अंधेरा है, रोज़ सा बंद आँख में भी उसी चाहत का चेहरा है...  

By Neha yadav
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