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प्यास का...

प्यास का मेरी तुम ही, प्रिये आब हो आँख में जो बसा मखमली ख्याब हो रोज डे संग ले आई, प्रेम की फरबरी मैं करूँ क्या भला जब तुम गुलाब हो

By Rishabh Tomar
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