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पत्र लिखा...
“
पत्र लिखा है पुत्र ने, आएगा इस बार। दीप जलाने साथ में, फिर पुरखों के द्वार। फिर पुरखों के द्वार, पर्व की धूम मचेगी। भक्ति भाव के साथ, लक्ष्मी-मातु पुजेगी। माँ के मुख पर आज, अनोखा रंग दिखा है आएगा इस बार, पुत्र ने पत्र लिखा है। - कल्पना रामानी
”
By
कल्पना रामानी
145
पत्र
पुत्र
कुण्डलिया
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कल्पना रामानी
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