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जगमग तारों...
“
जगमग तारों से भरा, सजा गगन का थाल। आज अमावस रात है, लाई तम का काल। लाई तम का काल, जले दीपक घर-घर में और पर्व का दौर, चला हर गाँव शहर में एक नया उल्लास, धरा पर बिखरा पग-पग सजा गगन का थाल, भरा तारों से जगमग। -कल्पना रामानी
”
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कल्पना रामानी
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कल्पना रामानी
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