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परख न थी...
“
परख न थी मुझे लोगों की, मुस्कराहट पे उनके यकीं कर बैठा, मतलबी,स्वार्थी चेहरों पर अपना दिल साझा कर बैठा।
”
By
संजय असवाल
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