“
पिता के बाद पति
एक स्त्री का दूसरा पिता होता है।
उसके सारे नखरे उठाने वाला,
उसकी हर ख्वाहिश पूरी करने वाला ,
जिंदगी का एक अहम हिस्सा। होता है।
छूट जाए यदि दुर्भाग्य से दोनों सहारे ,
तो दुनिया में कोई पूछने वाला भी नहीं होता है ।
भाई बंधु ,संतान या रिश्तेदार ,
मात्र औपचारिकता निभाते है।
वास्तव में प्रेम करने वाला स्त्री को,
पहले उसका पिता ,फिर बाद में उसका पति होता है।
”