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नज़्म अगर...

“ नज़्म अगर सिर्फ स्याही से लिखा जाता, तो ज़माना कलम का दीवाना होता। शायर मारे मारे फिरते बाजार में, कागजों का शामियाना होता।। ”

By Rishab Kapoor
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