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में तेरी...

में तेरी निगाहों में कुछ इस कदर डुबा, के उभरना चाहा मगर फिर भी किनारा न मिला। खुदा का शुक्र है के डूबने को तेरी ही निगाहें मिली, फिर क्या हुआ जो डूब के जान गई, किनारा ना मिला।।

By Rishab Kapoor
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