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निसर्ग...
“
निसर्ग (त्याग)भाव हो सभी में, जगत यह स्वर्ग सदृश हो जाय। अपनेपन की भावना हो सभी में, नहीं बेगाना कोई भी रह पाय। # गायत्री सिंह #
”
By
Gayatri Singh
229
निसर्ग (त्याग)
सभी में
उगाचचिंतीतहोतो.हेसमजतउमजतअसूनहीकामाणूसवर्तमानातजगणसोडतो.अस्मिताप्रशांतपुष्पांजलि
स्वर्ग सदृश
अपनेपन की भावना
बेगानापन
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