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ना जाने...

ना जाने क्यों मैं ये हर दफ़ा कर रहा हूँ इस जमाने की ख़ातिर खुदको ख़फ़ा कर रहा हूँ उजाड़ रहा हूँ मैं खुदकी ख़ुशियाँ और खुदकी ही ख़्वाहिशों को तबाह कर रहा हूँ अजीब सा सर्फ़िरा हूँ मैं यार जो ये सब बेवजह कर रहा हूँ

By Fanindra Bhardwaj
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