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आंखें भर...

आंखें भर आयीं थी मेरी एक रोज़ वो बात सोच कर किस कदर बिखर गये थे मेरे हालात सोच कर ग़म तो आँखों ने छुपा लिए अश्क़ों की बरसात समेटकर मगर ये वक्त ही कमबख़्त था जो गुजर गया मेरे जज़्बात खरोंचकर

By Fanindra Bhardwaj
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