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ना हँसो ना...

ना हँसो ना तंज कसो मुझ पर जब मैं इस दर्द से छटपटाती हूँ क्योंकि इसी माहवारी की बदौलत मैं नारी सम्पूर्ण नारी कहलाती हूँ ये रक्त ही तो पूर्ण करता मुझे ना घृणा ना छुआछूत करो मुझसे बस इसी की बदौलत मैं ‘भ्रूण' से इंसान बनाती हूँ।।

By Dr. Chanchal Chauhan
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