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न जाने किस...

“ न जाने किस बात से मै बेखबर रहा एक उसकी आरज़ू में पढ़ा मेरा बसर रहा नहीं जनता मै कब और किधर रहा वाकिफ तो बेवफाई से उसकी मगर रहा कसूर उनका नहीं मेरा था जो अनजान मेरा सफर रहा ! ”

By Samreen Sheikh
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