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मुस्कान...
मुस्कानों से इन...
मुस्कानों...
“
मुस्कानों से इन अधरो की अनबन होना बाकी है
सांझ ढली तो बुझा बुझा घायल मन होना बाकी है
अभी अभी दो आंसू टपके है मेरी इन आंखो से
अभी तुम्हारी यादों का सम्मेलन होना बाकी है..।।
©Ananya Rai Parashar
”
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