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मुफ़लिसी...

मुफ़लिसी वाली आशिक़ी आज भी मौजूद है, उन दिल की चाहतों का आज भी वजूद है, दौलत के नशे से चूर होकर मत देखिए जनाब, नज़रें उठा करके देखिएगा,वही मंज़र बेतहाशा है।

By Juhi Grover
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