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मौत के...

मौत के तांडव में त्राहिमाम हुआ है सारा आलम, तुटे हुए सपनों की किंमत कहीं दिखाई नहीं देती। "युध्ध से क्या मिला यह पुछ रहा है आज "मुरली", मानवता की पहचान कहीं भी दिखाई नहीं देती।" रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

By Dhanjibhai gadhiya "murali"
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