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माॅ॑ है घर...

“ माॅ॑ है घर की शान निराली। फैली रहती घर में हरियाली। बिन माॅ॑ के सूना घर आॅ॑गन। माॅ॑ बिन नहीं लगता है मन। कभी न दिल माॅ॑ का दुखाना। माॅ॑ बिन नहीं कहीं ठिकाना। ममता की मूरत बस माॅ॑ है। खुशियों का सागर भी माॅ॑ है। ”

By Suresh Sachan Patel
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