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#कविता जो...

#कविता जो बात कहीं लबों पर आकर रुक जाती है, कविता के रूप में पन्नों पर उतर आती है, जब कोई बात तीर सी चुभ जाती है, कविता जैसे आकर मरहम बन जाती है।

By Jyoti Sagar Sana
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