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कश्मकश है...
“
कश्मकश है आज मौसम में महकी हुई है पुरवाई। तेरी याद में दिल मदहोश हो उठा, और तू, दबे पाँव मेरे ख्वाबों में चली आई।
”
By
Denzil Vonlintzgy
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