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किसकी चमक...

किसकी चमक से ये चाँद इस तरह डाँक रहा है किसकी चमक से ये चाँद आज चुपके से ये चाँद इस तरह से डाँक रहा है आज चुपके से ये चाँद किस किस को ताक रहा है समाई तो चाँदनी है फिर खिड़की के उस पार से क्यों बैरी हमदोनों को झाँक रहा है

By Kanchan Prabha
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