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किसी पहली...

किसी पहली दिलरुबा की तरह याद आती है ये बारिश जब जब आती है, बहुत सताती है हर शाख के पत्तों से टपकती है इंतज़ार बनकर उनकी याद में भिगाती और दिल जलाती है !

By Ashutosh Singh
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