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कई रंगत है...

कई रंगत है मेरे सहर के , उसकी इक "शुभम्" से पहचान न करो। कहीं दूर छोर आये है वो गालियां ; आब तो उन्हें बदनाम न करो... ।। शुभम्

By Shubham Kumar
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