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कि...

कि गुनाह-ए-अज़ीम भी हमको, जन्नत से बचा न सका, क़ुसूर सिर्फ इतना था कि मोहब्बत, शिद्दत से निभा गए हम |

By अनूप सिंह चौहान ( बब्बन )
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